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Fake OBC Certificate: भरतपुर में पूर्व प्रधान कविता फौजदार हुई गिरफ्तार, फर्जी OBC प्रमाण पत्र से सरकारी नौकरी और प्रधान का चुनाव लड़ने का लगा आरोप

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उत्तर प्रदेश  Published by: Shikha , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shikha, Date: 03/09/2026 02:55:08 pm Share:
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  • 03/09/2026 02:55:08 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: भरतपुर जिले के कुम्हेर में फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने और पंचायत समिति कुम्हेर के प्रधान पद का चुनाव लड़कर निर्वाचित होने के आरोप में कांग्रेस की पूर्व प्रधान कविता फौजदार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: भरतपुर जिले के कुम्हेर में फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने और पंचायत समिति कुम्हेर के प्रधान पद का चुनाव लड़कर निर्वाचित होने के आरोप में कांग्रेस की पूर्व प्रधान कविता फौजदार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कुम्हेर थाना पुलिस ने बुधवार को उन्हें उनके घर से गिरफ्तार किया। इसके बाद एसीजेएम कोर्ट डीग में पेश किया गया, जहां से न्यायालय के आदेश पर उन्हें महिला जेल भरतपुर भेज दिया गया।

UP के मथुरा से जुड़ा मिला कनेक्शन

शिकायतकर्ता रश्मि फौजदार ने आरोप लगाया है कि कविता फौजदार का जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में हुआ था और उनकी शिक्षा भी वहीं हुई। शादी के बाद वह कुम्हेर क्षेत्र के रीठौठी गांव में रहने लगीं। आरोप है कि राजस्थान में ओबीसी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन करते समय कविता ने खुद को और अपने माता-पिता को कुम्हेर का निवासी बताया। इसके समर्थन में वर्ष 1993 की मतदाता सूची में कथित कूटरचना कर दस्तावेज तैयार किए गए।

2021 में मिली थी सरकारी नौकरी

शिकायत के अनुसार, इसी कथित फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र के आधार पर कविता फौजदार ने वर्ष 2021 में कोविड हेल्थ सहायक के पद पर सरकारी नौकरी हासिल की। इसके बाद इसी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल पंचायत समिति कुम्हेर के प्रधान पद के चुनाव में किया गया। आरोप है कि इसी आधार पर उन्होंने प्रधान पद का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

पति समेत पांच लोगों की जांच जारी 

मामले में कविता फौजदार के पति श्यामवीर सिंह के अलावा ई-मित्र संचालक, पटवारी और एक गवाह की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस ओबीसी प्रमाण पत्र, वर्ष 1993 की मतदाता सूची समेत अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही नामजद अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था।

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