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Molestation of Case: 12 साल की चचेरी बहन से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल का मिली कठोर सजा, पीड़िता को ₹15 लाख रुपए की मिलेगी सहायता
- Photo by : social media
संक्षेप
दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने 12 वर्षीय बच्ची के साथ गंभीर यौन अपराध के मामले में आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
विस्तार
दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने 12 वर्षीय बच्ची के साथ गंभीर यौन अपराध के मामले में आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी के कृत्य को बेहद घृणित, निंदनीय, अमानवीय और संवेदनहीन करार दिया। अदालत ने कहा कि बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराध का असर केवल घटना तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और भविष्य पर लंबे समय तक पड़ सकता है। अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण को ₹15 लाख की सहायता राशि देने का भी निर्देश दिया है। रिश्तों की मर्यादा पर अदालत की सख्त टिप्पणी सजा सुनाते हुए न्यायाधीश नीति सूरी मिश्रा ने कहा कि जब रिश्तों की मर्यादा और बच्चों की मासूमियत का सम्मान नहीं किया जाता, तब बच्चियां अपने ही घर की चारदीवारी में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर पातीं। अदालत ने आरोपी के व्यवहार को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि बच्चों को सुरक्षा और विश्वास का वातावरण मिलना चाहिए, लेकिन जब कोई करीबी व्यक्ति ही उस विश्वास को तोड़ता है तो उसका प्रभाव बेहद गंभीर होता है। अदालत की टिप्पणी में परिवार के भीतर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी सामने आई। पीड़िता पर जीवनभर रह सकता है मानसिक असर अदालत ने कहा कि यौन अपराध की भयावह यादें पीड़िता को लंबे समय तक मानसिक पीड़ा दे सकती हैं। ऐसे अपराधों के बाद बच्चे कम आत्मसम्मान, मानसिक तनाव, भय और गंभीर मनोवैज्ञानिक परेशानियों से गुजर सकते हैं। अदालत ने माना कि घटना के बाद पीड़िता के सामान्य जीवन, सामाजिक संबंधों और भविष्य पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में अपराध की गंभीरता के साथ पीड़िता को हुए मानसिक और भावनात्मक नुकसान को भी ध्यान में रखना जरूरी है। बचाव पक्ष ने आरोपी की पारिवारिक स्थिति का दिया हवाला सजा के दौरान आरोपी की ओर से अदालत से नरमी बरतने की अपील की गई। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी की उम्र अब 42 वर्ष है और उसके परिवार में तीन बच्चे तथा बुजुर्ग माता-पिता हैं, जिनकी जिम्मेदारी उसके ऊपर है। बचाव पक्ष की ओर से उसकी पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए सजा में राहत देने का अनुरोध किया गया और अदालत से मानवीय आधार पर विचार करने की अपील की गई। अदालत ने कहा- व्यक्तिगत परिस्थितियां अपराध से बड़ी नहीं अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि आरोपी की व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियां उस मानसिक पीड़ा से बड़ी नहीं हो सकतीं, जिसे एक बच्ची को ऐसे अपराध के बाद लंबे समय तक सहना पड़ सकता है। अदालत ने अपराध की प्रकृति, पीड़िता की कम उम्र और उसके ऊपर पड़े संभावित दीर्घकालिक प्रभाव को देखते हुए आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। 2013 में घर में अकेली थी 12 वर्षीय बच्ची अभियोजन पक्ष के अनुसार यह मामला वर्ष 2013 का है। घटना के समय पीड़िता की उम्र महज 12 वर्ष थी। बताया गया कि घटना के समय उसके भाई-बहन घर से बाहर खेल रहे थे, जबकि माता-पिता भी घर पर मौजूद नहीं थे। इसी दौरान आरोपी, जो उस समय 25 वर्ष का था और पीड़िता की बुआ का बेटा था, बच्ची के घर पहुंचा और उसके साथ गंभीर यौन अपराध किया। मामले में सामने आए तथ्यों और सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया और अब उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है और बच्ची को 15 लाख रुपये की सहायता राशि देने का निर्देश भी दिया है।