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Fake Marksheet Racket: 10वीं-12वीं की फर्जी मार्कशीट बेचने वाले गिरोह का हुआ भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
- Photo by : social media
संक्षेप
दिल्ली: दिल्ली पुलिस की शाहदरा जिला स्पेशल स्टाफ टीम ने 10वीं और 12वीं कक्षा की फर्जी मार्कशीट और शैक्षणिक प्रमाण पत्र तैयार कर बेचने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
विस्तार
दिल्ली: दिल्ली पुलिस की शाहदरा जिला स्पेशल स्टाफ टीम ने 10वीं और 12वीं कक्षा की फर्जी मार्कशीट और शैक्षणिक प्रमाण पत्र तैयार कर बेचने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी मार्कशीट, लैपटॉप, प्रिंटर और जाली दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी अब तक 100 से अधिक फर्जी प्रमाण पत्र बेच चुके थे और इस अवैध कारोबार से मोटी कमाई कर रहे थे। आइये जानते है पूरी खबर। फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र तैयार कर लोगों को बेचता था गिरोह जानकारी के मुताबिक, शाहदरा के पुलिस उपायुक्त डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि शाहदरा का रहने वाला नवनीत त्यागी 53 फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र तैयार कर लोगों को बेचता है। सूचना की पुष्टि के लिए स्पेशल स्टाफ ने योजनाबद्ध तरीके से फर्जी ग्राहक बनाकर संपर्क किया और जाल बिछाया। इसके बाद विकास मॉल, शाहदरा के पास छापेमारी कर नवनीत त्यागी को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से 10वीं और 12वीं की कई फर्जी मार्कशीट बरामद हुईं। पूछताछ के दौरान नवनीत ने अपने दो अन्य साथियों सबाब आलम 41 और फरीद अहमद सैफी 49 के नाम बताए। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के ठिकानों की तलाशी में एक लैपटॉप, प्रिंटर, डिजिटल फाइलें और जाली दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान बरामद किया गया। पुलिस की कार्रवाई पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी 'ग्रामीण मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान' के समाप्त हो चुके पंजीकरण का दुरुपयोग कर रहे थे। वे बैकडेटेड मार्कशीट और सर्टिफिकेट तैयार कर उन्हें असली बताकर लोगों को बेचते थे। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अब तक करीब 100 से 150 फर्जी मार्कशीट और प्रमाण पत्र बेच चुके हैं। इसके बदले वे प्रत्येक दस्तावेज के लिए 5,000 से 10,000 रुपये तक वसूलते थे। दिल्ली पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किन-किन लोगों ने नौकरी, उच्च शिक्षा या अन्य सरकारी और निजी कार्यों में किया है। साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों तक भी जुड़े हो सकते हैं। मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है।