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Knife Crime: रील में चाकू दिखाने का ट्रेंड पड़ा भारी, 4 साल में 10,457 धारदार हथियार हुए बरामद
- Photo by : social media
संक्षेप
दिल्ली: सोशल मीडिया पर हाथ में चाकू और डैगर लेकर रील बनाने और तस्वीरों में दबंगई दिखाने का चलन अब गंभीर अपराधों से जुड़ता नजर आ रहा है।
विस्तार
दिल्ली: सोशल मीडिया पर हाथ में चाकू और डैगर लेकर रील बनाने और तस्वीरों में दबंगई दिखाने का चलन अब गंभीर अपराधों से जुड़ता नजर आ रहा है। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले चार साल में राजधानी में 10,457 धारदार हथियार बरामद किए गए हैं। इनमें चाकू, डैगर और अन्य नुकीले हथियार शामिल हैं। पुलिस जांच में कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए धारदार चाकू मंगवाए गए। 2024 में सबसे ज्यादा क्राइम नाइफ की हुई बरामदगी दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में चाकू समेत अन्य धारदार हथियारों की बरामदगी सबसे ज्यादा रही। वहीं 2026 में 15 अगस्त तक ही ऐसे हथियारों की बरामदगी का आंकड़ा दो हजार से अधिक पहुंच चुका था। पुलिस का कहना है कि अपराधियों द्वारा चाकू और अन्य धारदार हथियारों का इस्तेमाल हत्या और गंभीर हमलों में किया जा रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से पहुंच रहे चाकू पुलिस जांच में सामने आया कि कुछ धारदार चाकू ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर करीब 200 से 250 रुपये में उपलब्ध थे। ऑर्डर करने के बाद इन्हें सीधे घर तक पहुंचाया जाता था। पश्चिमी जिला पुलिस ने फरवरी 2026 में दो हत्या के मामलों में चाकू के इस्तेमाल के बाद ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म Blinkit के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि इस्तेमाल किए गए बटनदार चाकू इसी माध्यम से मंगवाए गए थे। पुलिस ने ऑनलाइन कंपनियों से मांगा डेटा डीसीपी आउटर विक्रम सिंह के मुताबिक, चाकू से जुड़े मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने Amazon और Meesho को पत्र लिखकर धारदार हथियारों की बिक्री से संबंधित जानकारी मांगी थी। पुलिस को बड़ी संख्या में डेटा मिलने के बाद मई 2026 में अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान 134 तेज धार वाले हथियार बरामद किए गए। हथियार रखने पर कानूनी पाबंदियां पुलिस के मुताबिक, कुछ विशेष आकार के चाकू और धारदार हथियार रखना कानून के दायरे में आ सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 7.62 सेंटीमीटर से ज्यादा लंबे और 1.72 सेंटीमीटर से ज्यादा चौड़े चाकू आर्म्स एक्ट के प्रावधानों के तहत आ सकते हैं। ऐसे में केवल यह तर्क कि चाकू ऑनलाइन खरीदा गया था या सामान्य चाकू के तौर पर बेचा जा रहा था, कानूनी कार्रवाई से बचने का आधार नहीं माना जा सकता। पुलिस अब ऑनलाइन बिक्री और सप्लाई से जुड़े डेटा के आधार पर धारदार हथियारों की खरीद-फरोख्त पर निगरानी बढ़ा रही है। सोशल मीडिया पर हथियारों की नुमाइश और इनके अपराधों में इस्तेमाल को देखते हुए पुलिस ऐसे मामलों में कार्रवाई पर भी जोर दे रही है।
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