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Ganesh Visarjan 2026: गणेश विसर्जन के दौरान गंदा पानी, टूटी मूर्तियां और बिखरा कचरा बना परेशानी का कारण, कई जगहों पर उठे सवाल
- Photo by : social media
संक्षेप
दिल्ली: गणेश विसर्जन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी तस्वीरें और खबरें सामने आई हैं, जिनमें पर्यावरण नुकसान पहुंचने के साथ-साथ भगवान गणेश की मूर्तियों के सम्मान को लेकर भी सवाल उठे हैं।
विस्तार
दिल्ली: गणेश विसर्जन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी तस्वीरें और खबरें सामने आई हैं, जिनमें पर्यावरण नुकसान पहुंचने के साथ-साथ भगवान गणेश की मूर्तियों के सम्मान को लेकर भी सवाल उठे हैं। ऐसा ही एक मामला गोवा के संगुएम इलाके के कोस्ती गांव में स्थानीय नाले में सूअर फार्म से आने वाली गंदगी के कारण ग्रामीणों ने वहां गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का विरोध किया और साफ पानी की व्यवस्था कराने की मांग की गई। लेकिन साफ़ पानी उपलब्ध न होने पर लोगों ने मजबूरन पानी से भरे बैरल में प्रतिमाओं का विसर्जन किया और ऐसी ही कई तस्वीरें पुरे देश से सामने आई है। देश के हर हिस्से में विसर्जन की अलग-अलग समस्याएं आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में पानी की कमी के कारण चित्रावती नदी और कुछ नहरों के सूखे तल पर गणेश प्रतिमाएं छोड़े जाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। वहीं, उत्तर प्रदेश के कौशांबी में मूरतगंज के पक्का तालाब की सफाई और पर्याप्त साफ पानी की व्यवस्था नहीं होने पर श्रद्धालुओं ने नाराजगी जताई। इसके बाद प्रशासन ने तालाब की सफाई कराई और गंगाजल से शुद्धिकरण कराया। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में भी विनायक सागर में विसर्जन के बाद आधी डूबी मूर्तियां, फूल-मालाएं और सजावटी सामग्री दिखाई दी। कई जगहों पर प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के इस्तेमाल से जल प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ी है। अयोध्या के ढेमवाघाट पर भी विसर्जन व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया। आरोप है कि पुलिस ने कुछ प्रतिमाओं को पुल से नदी में गिरवा दिया, जिस पर श्रद्धालुओं ने विरोध जताया और विधि-विधान से विसर्जन की मांग की। भोपाल में पिछले साल विसर्जन के बाद बड़ी मात्रा में पूजा सामग्री और कचरा निकाला गया था। वहीं कुछ स्थानों पर पानी में भारी धातुओं की मौजूदगी भी दर्ज की गई। पर्यावरण-अनुकूल गणेश विसर्जन की मांग हुई तेज इन घटनाओं के बीच पानी में सरलता से घुलने वाली मिट्टी की मूर्तियों, कृत्रिम विसर्जन टैंकों और घर पर विसर्जन जैसे पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने की मांग तेज हुई है। क्योंकि हिन्दुओं के पारंपरिक विसर्जन देश के हर हिस्से में संभव नहीं है और विसर्जन के बाद जो सामग्री बच जाती है जैसे:- खंडित मूर्ति के अवशेष, फूल और मालाएं, कपड़े और चुनरी इत्यदि इनसे नदियों का प्रदूषण भी बढ़ जाता है।
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