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मध्य प्रदेश: पीएम आवास योजना में भ्रष्टाचार के आरोप, किया जा रहा गरीबों का हक छीनने का दावा

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मध्य प्रदेश  Published by: Fulchand Malviya , मध्य प्रदेश  Edited By: md anish, Date: 01/08/2026 04:06:52 pm Share:
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  • Edited By.: md anish,
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  • 01/08/2026 04:06:52 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार और स्थानीय प्रशासन के तमाम दावों के बीच देवास जिले के अंतर्गत आने वाली टोंकखुर्द नगर परिषद में भ्रष्टाचार और घूसखोरी की सारी हदें पार हो चुकी हैं। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना, जो गरीबों को पक्का मकान देने के लिए बनाई गई थी।

विस्तार

मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार और स्थानीय प्रशासन के तमाम दावों के बीच देवास जिले के अंतर्गत आने वाली टोंकखुर्द नगर परिषद में भ्रष्टाचार और घूसखोरी की सारी हदें पार हो चुकी हैं। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना, जो गरीबों को पक्का मकान देने के लिए बनाई गई थी। वह अब भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी के लिए कमाई का जरिया बन गई है। टोंकखुर्द नगर परिषद में खुलेआम पैसे लेकर अपात्र और अमीर लोगों को प्रधानमंत्री आवास बांटे जा रहे हैं, जबकि जिनके पास दो वक्त की रोटी खाने के लिए पैसे नहीं हैं और जो टूटी-फूटी झोपड़ियों में जीने को मजबूर हैं। वे आज भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। टोंकखुर्द नगर परिषद क्षेत्र के स्थानीय रहवासियों और पीड़ितों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि यहाँ बिना पैसे दिए किसी भी पात्र गरीब का काम नहीं होता जिन लोगों के पास पहले से ही पक्के मकान, गाड़ियां और तमाम सुख-सुविधाएं हैं।

 

उन्होंने अधिकारियों की जेब गर्म करके अपने नाम से प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत करवा लिए हैं दूसरी ओर, जो वास्तविक और अत्यंत गरीब परिवार हैं, जिनके पास सिर छिपाने के लिए छत तक नहीं है और जो अपना जीवन बेहद दयनीय स्थिति में जीने को मजबूर हैं, उन्हें लगातार ठुकराया जा रहा है। इस योजना के तहत एक बड़ी विडंबना यह भी सामने आ रही है कि प्रशासन द्वारा गरीबों से जमीन की रजिस्ट्री या पक्के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जो अति-गरीब परिवार सालों से झोपड़ियों या बस्तियों में रह रहे हैं। उनके पास अपनी उस जमीन की पक्की रजिस्ट्री नहीं होती है इसी कानूनी पेचीदगी और दस्तावेजों की कमी का बहाना बनाकर भ्रष्ट अधिकारी पात्र गरीबों को योजना से बाहर कर रहे हैं, जबकि पैसों के दम पर अपात्र लोगों के आवेदन पास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के पास जाने पर गरीबों से पैसों की मांग की जाती है, जिसे देने में असमर्थ गरीब आज भी खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं।


भारतीय जनता पार्टी की सरकार और स्थानीय प्रशासन चाहे जितने भी पारदर्शी शासन के दावे कर लें, लेकिन देवास जिले के टोंकखुर्द की सच्चाई इन दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है। इस भ्रष्ट तंत्र ने साबित कर दिया है कि गरीबों के हक का पैसा खुलेआम लूटा जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं या इस मिलीभगत में बराबर के भागीदार हैं। टोंकखुर्द की जनता और पीड़ित परिवारों ने अब इस मामले में न्याय की गुहार लगाई है यदि जिला प्रशासन ने इस मामले में तुरंत संज्ञान नहीं लिया और पैसे लेकर फर्जी तरीके से आवास बांटने वाले भ्रष्ट अधिकारी व अपात्र लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो जनता कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से कड़ा विरोध दर्ज कराएगी।