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Rajouri Garden Murder Case: क्राइम ब्रांच की बड़ी कामयाबी, एक दशक से फरार दो शातिर हत्यारे हुए गिरफ्तार

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दिल्ली  Published by: Shikha , दिल्ली  Edited By: Shikha, Date: 09/07/2026 12:04:50 pm Share:
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  • 09/07/2026 12:04:50 pm
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संक्षेप

दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पिछले करीब एक दशक से कानून की नजरों से फरार चल रहे दो सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है।

विस्तार

दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पिछले करीब एक दशक से कानून की नजरों से फरार चल रहे दो सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान फिरासत अली 56 और शाहनवाज अली 51 के रूप में हुई है। ये दोनों आरोपी हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे, लेकिन पैरोल और जमानत का फायदा उठाकर फरार हो गए थे। अब करीब 10 साल बाद दोनों पुलिस के हत्थे चढ़े हैं और उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।

1996 का राजौरी गार्डन हत्याकांड और विवाद की वजह

जानकारी के मुताबिक, इस पूरे मामले की शुरुआत 27 सितंबर 1996 को दिल्ली के रघुबीर नगर स्थित पुराने कपड़ों के बाजार से हुई थी। वहां साड़ी खरीदने को लेकर दो परिवारों के बीच मामूली कहासुनी हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि आरोपी शाहनवाज ने दूसरे पक्ष के इश्तियाक अहमद को जान से मारने की धमकी दे डाली। उसी शाम करीब 4:30 बजे शाहनवाज ने अपने भाइयों फिरासत अली, अरशद अली और साथी जहांगीर खान के साथ मिलकर इश्तियाक पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस हमले में बीच-बचाव करने आए रियासत और डब्बू नाम के दो लोग भी गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस खूनी वारदात के बाद राजौरी गार्डन थाने में हत्या का केस दर्ज किया गया। साल 2000 में सेशन कोर्ट ने दोनों भाइयों (फिरासत और शाहनवाज) को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

 फरारी के दौरान मुंबई में की 'सुपारी किलिंग'

सजा मिलने के कुछ समय बाद दोनों को कोर्ट से जमानत मिल गई, जिसके बाद वे फरार हो गए। शाहनवाज साल 2016 से लगातार पुलिस को चकमा दे रहा था। वहीं, दूसरा भाई फिरासत अली और भी शातिर निकला। फरारी के दौरान ही उसने साल 2006 में मुंबई के एक बेहद सनसनीखेज मामले में 'सुपारी किलिंग' (भाड़े पर हत्या) की वारदात को अंजाम दे डाला। मुंबई पुलिस ने उसे 2018 में गिरफ्तार किया था, लेकिन 2021 में उसे बॉम्बे हाई कोर्ट से जमानत मिल गई। इसके बाद, दिल्ली के मर्डर केस में उसने 2023 में कोर्ट से 'फरलो' (अस्थायी छुट्टी) ली और फिर से गायब हो गया।

भेष बदलकर कर रहे थे कपड़ों का व्यापार, ऐसे चढ़े हत्थे

डीसीपी (क्राइम) संजीव यादव के मुताबिक, दोनों भाई अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग राज्यों में रह रहे थे और गुजारे के लिए पुराने कपड़ों का कारोबार कर रहे थे। क्राइम ब्रांच की टीम ने तकनीकी जांच और गुप्त सूचनाओं के आधार पर जाल बिछाया और 4 जुलाई को दोनों को दो अलग-अलग राज्यों से दबोच लिया। फिरासत अली को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से और शाहनवाज अली को झारखंड के गोड्‌डा से गिरफ्तार किया गया। दिल्ली पुलिस ने फिरासत की गिरफ्तारी की जानकारी मुंबई पुलिस को भी दे दी है ताकि वहां भी आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।